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मंगलवार, 12 जुलाई 2011

balliabole: आधुनिकताबोध और ग्रामीण सभ्यता

balliabole: आधुनिकताबोध और ग्रामीण सभ्यता
Posted by उमेश चतुर्वेदी at 6:01 am
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आज के दौर में असल में पत्रकारिता करने वाले के लिए माहौल कुछ वैसा ही है- जैसा इश्क के बारे में किसी कवि ने कहा है। यानी इक आग का दरिया है और डूब के जाना है। मेरी कोशिश इस आग के दरिया में डूबने की ही रहती है। कितना डूब पाया और कितना बच पाया,इसका फैसला आप सुधीजन ही कर सकते हैं।
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